वक्त के घरौंदे से
एक पल ही तोह चुराया है,
और उस पल से अपने टूटे
सपनों को सजाया है।
धूप से थोडी गर्मी मांग भी ली तोह क्या,
चांदनी से उसकी ठंडक छीन ली तोह क्या,
ज़िंदगी में हमने भी बहुत कुछ गवाया है।
Sunday, March 09, 2008 लेखक Piyush Aggarwal
वक्त के घरौंदे से
एक पल ही तोह चुराया है,
और उस पल से अपने टूटे
सपनों को सजाया है।
धूप से थोडी गर्मी मांग भी ली तोह क्या,
चांदनी से उसकी ठंडक छीन ली तोह क्या,
ज़िंदगी में हमने भी बहुत कुछ गवाया है।
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